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चश्मा कब लगाना चाहिए? कमजोर नजर के लक्षण क्या हैं?

Netracare
By Netracare
June 21, 2026
11 Min Read
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क्या आपको बार-बार धुंधला दिखता है, जैसे दूर या पास की चीजें धुंधली दिखती हैं, या मोबाइल देखने के बाद सिर दर्द होता है, अगर हां, तो शायद यह कमजोर नजर का संकेत हो सकता है। दरअसल आज के समय बढ़ते प्रदूषण और लगातार स्क्रीन के उपयोग के कारण बच्चों से लेकर बड़ों तक की आंखों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। खासकर निकट दृष्टि दोष, दूर दृष्टि दोष और बच्चों में दृष्टिवैषम्य जैसी बीमारी बढ़ती जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है की चश्मा कब लगाना चाहिए और इसके शुरुआती संकेत क्या होते हैं।

Contents
  • कमजोर आंखो के शुरुआती लक्षण
    • 1. धुंधला दिखना
    • 2. बार-बार सिरदर्द होना
    • 3. डबल दिखना या रात में कम दिखना
    • 4. पढ़ाई या काम में ध्यान न लगना
    • 5. भौंहें चढ़ाना या आंखें सिकोड़ना
    • 6. बार-बार आँसू आना या सूखापन
  • चश्मा कब लगाना चाहिए?
  • कंप्यूटर और मोबाइल इस्तेमाल करने वालों के लिए खास चश्मा
  • सही समय पर चश्मा न लगाने के क्या नुकसान हो सकते हैं?
  • चश्मा लगवाने से पहले क्या करें?
  • क्या चश्मा लगाने से आंखों का नंबर बढ़ जाता है?
    • असल सच्चाई क्या है?
    • चश्मा लगाने से नंबर कब बढ़ता है?
  • निष्कर्ष

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि आंखों की रोशनी कमजोर होने के संकेत क्या हैं, किस को चश्मा लगवाना चाहिए और सही समय पर चश्मा न लगाने के क्या नुकसान हो सकते हैं।

कमजोर आंखो के शुरुआती लक्षण

अक्सर लोग तब तक चश्मा नहीं लगवाते जब तक कि उन्हें बहुत ज्यादा परेशानी न हो। लेकिन अगर आप नीचे दिए गए लक्षणों में से किसी को भी महसूस कर रहे हैं, तो यह आपके लिए चश्मा लगाने का सही समय हो सकता है:

1. धुंधला दिखना

अगर आपको सड़क पर दूर के बोर्ड, गाड़ी की नंबर प्लेट, या टीवी के शब्द एक आंख या दोनो आंख से साफ नहीं दिखते हैं, तो यह मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) का लक्षण हो सकता है। वहीं, अगर किताब या मोबाइल पास लाने पर धुंधला दिखे, तो यह हाइपरमेट्रोपिया (दूर दृष्टि दोष) जैसी समस्या के लक्षण हो सकता हैं या प्रेसबायोपिया के लक्षण हो सकते है।

2. बार-बार सिरदर्द होना

अगर आपको पढ़ाई या कंप्यूटर पर काम करने के बाद माथे या आंखों के आसपास दर्द होता है, तो यह आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने का संकेत हो सकता है। जो दिमाग आंखों की कमजोरी को कंपेंसेट करने की कोशिश करता है, जिससे सिरदर्द व आंख के आस-पास दर्द होने लगता है।

3. डबल दिखना या रात में कम दिखना

अगर आपको रात के समय गाड़ी चलाने में परेशानी होती है, जैसे लाइटें फैलती हुई दिखती हैं, या कभी-कभी एक आंख या दोनो आंख से चीजें दोहरी दिखने लगती हैं, तो यह दोहरी दृष्टि (डिप्लोपिया) के लक्षण हो सकते हैं।

4. पढ़ाई या काम में ध्यान न लगना

बच्चों में अक्सर निकट दृष्टि दोष और दृष्टिवैषम्य जैसी समस्या होने के कारण साफ नही देख पाते हैं, जिसके कारण पढ़ाई में मन भी नहीं लगता, क्यूंकि की ब्लैक बोर्ड पर लिखा नही देख पाते है और टेढ़े अक्षर लिखना, या किताब को आंख के बहुत पास या टीवी के बहुत पास बैठ कर देखना जैसे अन्य लक्षण दिखने लगते हैं।

5. भौंहें चढ़ाना या आंखें सिकोड़ना

अगर आप या आपके बच्चे किसी चीज को देखते समय आंखें सिकोड़ते हैं या भौंहें चढ़ाते हैं, तो यह साफ संकेत है कि आंखों को फोकस करने में मुश्किल हो रही है, जिसके कारण आंखें सिकोड़ना पड़ता है, जबकि यही चीज बार-बार करने पर आंखो की मांसपेशिया पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है, जिसके कारण आंख फड़कने जैसी समस्या पैदा हो सकती है।

6. बार-बार आँसू आना या सूखापन

अगर आपकी आंखें बिना वजह फट रही हैं या बिल्कुल सूखी महसूस होती हैं, तो यह ड्राई आई सिंड्रोम या अनडिटेक्टेड नंबर का संकेत हो सकता है, जिसके कारण बार-बार आँसू आना आंखो में जलन होना, दर्द होने जैसी समस्या हो सकती है।

चश्मा कब लगाना चाहिए?

चश्मा लगाने की कोई एक निश्चित उम्र और समय सीमा नही होती है, लेकिन अधिकतर मामलों में जैसे निकट दृष्टि दोष, दूर दृष्टि दोष और दृष्टिवैषम्य जैसी स्थिथि में ज्यादा तर लोग चश्मा लगाते है, जिससे नजर साफ हो जाती है, लेकिन उम्र के हिसाब से आंखो की जाँच करवा के समस्या होने पर चश्मा लगवा लेना चाहिए जैसे:

  • 1. बच्चे (3 से 15 वर्ष) सबसे पहले बच्चों की आंखो की जाँच करवाएं खासकर स्कूल जाने से पहले एक बार जरूर करवाएं । अगर आपका बच्चा स्क्रीन के बहुत पास बैठता है, आंखें मलता है, या पढ़ाई में रुचि नहीं लेता, तो यह कमजोर आंख के लक्षण हो सकते हैं, अगर ये सब लक्षण न दिखे तब भी जाँच करवा लेना चाहिए। क्यूंकि आंखो की जाँच से समस्या का पता चलता है और समस्या होने पर समय पर चश्मा लगाने से दृष्टि में सुधार होता है और आलसी आंख जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है।
  • 2. युवा (16 से 40 वर्ष) इस उम्र में ज्यादातर लोगों को मोबाइल और लैपटॉप के ज्यादा इस्तेमाल करने की वजह से डिजिटल आई स्ट्रेन होता है। लेकिन अगर आपको दूर या पास की चीजें साफ नहीं दिख रही हैं, तो सबसे पहले आंखो की जाँच करवाएं और समस्या होने पर चश्मा लगवाने में देरी न करें।
  • 3. बुजुर्ग (40 वर्ष और उससे अधिक) 40 की उम्र के बाद ज्यादा तर लोगों में प्रेसबायोपिया विकसित होने लगता है, जो उम्र से संबंधित होता है, जिसके कारण बारीक काम करने में धुंधलापन महसूस होने लगता है, जो एक आम आम समस्या है। क्यूंकि इस उम्र में छोटे अक्षर पढ़ने में दिक्कत होने लगती है। ऐसे में आंखो की जाँच करवा के रीडिंग ग्लासेस या प्रोग्रेसिव लेंस लगवा लेना चाहिए। क्यूंकि लापरवाही करने से आंखो की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और मोतियाबिंद या ग्लूकोमा जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है।

कंप्यूटर और मोबाइल इस्तेमाल करने वालों के लिए खास चश्मा

आज के डिजिटल युग में, अगर आपकी नजर कमजोर नहीं भी है, तब भी ब्लू कट लेंस, जिसे एंटी-ग्लेयर चश्मा कहा जाता है, उसे इस्तेमाल करना चाहिए, जो बहुत फायदेमंद होता है, लेकिन एक अच्छी क्वालिटी का होना चाहिए। क्यूंकि यह स्क्रीन से निकलने वाली हानिकारक नीली रोशनी को रोकता है, जिससे आंखों में सूखापन और डिजिटल आई स्ट्रेन कम होता है।

सही समय पर चश्मा न लगाने के क्या नुकसान हो सकते हैं?

बहुत से लोग नज़र कमजोर होने के बाद भी चश्मा लगाने से कतराते हैं, लेकिन इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं जैसे:

  • आंखों का नंबर तेजी से बढ़ना, क्यूंकि जब आंखें बिना चश्मे के अधिक मेहनत करती हैं, तो यह आंखो को और कमजोर कर देती है, जिसके कारण अत्यादीख कम दिखने लगता है।
  • नजर कमजोर होने पर बिना चश्मे के रहेने से सिरदर्द और गर्दन में दर्द होने लगता है और ज्यादा तर मामलों में लगातार आंखों पर दबाव बने रहने से माइग्रेन जैसी समस्या भी बन जाती है।
  • दुर्घटना का खतरा बना रहता है, खासकर गाड़ी चलाते समय, क्यूंकि सही दिखाई न देने के कारण एक्सीडेंट हो सकता है।
  • बच्चों में पढ़ाई में पिछड़ना, क्यूंकि अगर बच्चे को ब्लैक बोर्ड पर लिखा दिखाई नहीं देता, तो वह क्लास में ध्यान नहीं दे पाता और उसका आत्मविश्वास कम होने लगता है।

चश्मा लगवाने से पहले क्या करें?

  • आई चेकअप करवाएं: रेडीमेट और किसी दूसरे का चश्मा इस्तेमाल न करें। हमेशा किसी अच्छे ऑप्टोमेट्रिस्ट या नेत्र रोग विशेषज्ञ से सबसे पहले आंखों की जांच करवाएं।
  • सही लेंस चुनें: आप अपनी जरूरत के हिसाब से प्रीमियम, ब्लू कट, फोटोक्रोमिक, या थिन लेंस का चुनाव कर सकते हैं।
  • फ्रेम का सही चुनाव: फ्रेम हल्का और आपके चेहरे पर जो फिट बैठे उसी का चुनाव करें, ताकि नाक और कान पर दबाव न पड़े और निचे झुकने पर गिरे न।

क्या चश्मा लगाने से आंखों का नंबर बढ़ जाता है?

हमारे यहाँ यह एक बहुत बड़ा मिथक बन चूका है कि चश्मा लगाने से आंखों का नंबर बढ़ जाता है। सच यह है कि चश्मा नंबर बढ़ाता नहीं है, बल्कि आपकी आंखों को सही फोकस करने में मदद करता है। दरअसल जब आपकी नजर कमजोर होती है और आप चश्मा नहीं लगाते हैं, तो आंखों की मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव पड़ता है। इससे आपको धुंधला दिखना, सिरदर्द और आंखों में थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

असल सच्चाई क्या है?

  • चश्मा सिर्फ आपकी नजर को साफ करता है
  • यह आंखों की कमजोरी को बढ़ाता नहीं है
  • सही नंबर का चश्मा आंखों को आराम देता है

चश्मा लगाने से नंबर कब बढ़ता है?

चश्मा लगाने के बाद भी नंबर बढ़ने के असली कारण ये होते हैं:

  • प्राकृतिक प्रोग्रेशन: बच्चों और युवाओं में खासकर निकट दृष्टि दोष जैसी समस्या होने के कारण समय के साथ चश्मे का नंबर बढ़ सकता है, क्यूंकि उम्र बढ़ने के साथ-साथ आंखें भी बढ़ती हैं, इसलिए पावर भी बदलती है
  • ज्यादा स्क्रीन टाइम: मोबाइल, लैपटॉप, टीवी का लगातार उपयोग करने से डिजिटल आई स्ट्रैन होता है, जिससे फोकस करने की क्षमता प्रभावित होती है और चश्मे का नंबर भी बढ़ने का खतरा बना रहेता है
  • गलत पावर का चश्मा: अगर आप गलत नंबर का चश्मा पहनते हैं या बिना जांच के रेडीमेड चश्मा पहनते हैं तो धुंधलापन और सिरदर्द बढ़ सकता है और चश्मे का नंबर भी बढ़ सकता है
  • खान-पान और रहन-सहन: अधिकतर मामलों में खान-पान में कमी होनी के कारण और रहन-सहन की वजह से आंखे कमजोर होने लगती है और देखने की छमता घटने लगती है, जिसके कारण चश्मे का नंबर बढ़ जाता है

निष्कर्ष

अगर आपको धुंधला दिखना, सिरदर्द, या आंखों में थकान जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। क्यूंकि सही समय पर चश्मा लगाना आपकी आंखों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है।

याद रखें: जितनी जल्दी समस्या पहचानेंगे, उतना आसान इलाज होगा।

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